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Saturday, 8 July 2023

मुरादाबाद के धर्मात्मा सरन ने समाज सेवा को समर्पित कर दिया था संपूर्ण जीवन

आर्य समाज के दस नियमों में एक नियम है कि प्रत्येक को अपनी ही उन्नति में  संतुष्ट नहीं रहना चाहिए किंतु सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए । इस नियम को अपने जीवन में उतारा था महानगर के ऐसे व्यक्ति ने जिसे हम जनता सेवक समाज के संस्थापक  धर्मात्मा सरन के रूप में जानते हैं। जी हां, एक ऐसा कर्म योगी जिसने यथा नाम तथा गुण कहावत को चरितार्थ कर अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा में समर्पित कर दिया था। उनके जीवन का एकमात्र मंत्र यही था ईशावास्यं इदं सर्वयत किश्च जगत्यां जगत। सब जगत ईश्वर है, यह जानकर सब से प्रेम करें। सब की सेवा करें ,यही परमात्मा की सेवा है। सदैव सत्य के लिए जिएं और जो भी कार्य करें सत्य के लिए ही करें । निर्भय होकर जो भी कार्य हम ईश्वर को साक्षी मानकर करते हैं वही ईश्वर भक्ति है। 

आर्थिक संघर्षों में बीता बचपन

सर्वधर्म समभाव के प्रबल पक्षधर और जनसेवा के धनी जिन्हें मुरादाबाद का गांधी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी का जन्म 100 साल पहले आज के ही दिन पहली अक्टूबर 1919 को मुरादाबाद के मुहल्ला तंबोली में हुआ था। आपके पिता रघुनंदन प्रसाद मुनीम थे । बाल्यकाल में ही आप माता पिता की छत्रछाया से वंचित हो गए जिसकी पूर्ति उनकी दादी जय देवी ने की। बचपन से ही आर्थिक समस्याओं से उन्हें जूझना पड़ा और वे अपनी शिक्षा भी पूरी नहीं कर सके।

 

आजादी के आंदोलनों में भी लिया था हिस्सा

वर्ष 1930 में टाउन हॉल के मैदान में अंग्रेजो के खिलाफ एक जलसा हुआ था। पहली बार उन्होंने उस में भाग लिया। भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने  भागीदारी निभाई। कांग्रेस सेवा दल में भी वर्षों कार्य किया तथा सर्वोदय संस्था में भी सक्रिय भागीदारी निभाई  । इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी और आचार्य विनोवा भावे को अपने जीवन का आदर्श मान लिया था।वर्ष 1940 में आपके ऊपर गृहस्थ जीवन का भार पड़ा परंतु समाज सेवा के कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी। वर्ष 1952 से 1954 तक आप  कांग्रेस कमेटी के सचिव पद पर भी रहे। उस समय कमेटी के अध्यक्ष भूतपूर्व सांसद हाफिज मुहम्मद सिद्दीक के पिता हाजी मुहम्मद इब्राहिम थे।

1957 में स्थापना की थी जनता सेवक समाज की

 स्वतंत्रता के आंदोलनों में हिस्सा लेने के दौरान ही उनके अंदर समाज सेवा की भावना जागृत हो गई। समाज सेवा के क्षेत्र में लाने का श्रेय वह पंडित जुगल किशोर शर्मा, हाजी मोहम्मद इब्राहिम, हरिकिशन दास टन्डन और वैद्य हरि प्रसाद शास्त्री को देते थे। उन्होंने जुलाई 1957 में जनता सेवक समाज की स्थापना की जिसका उद्देश्य था- सभी धर्मों के प्रति समानता का भाव रखना, बिना किसी भेदभाव के निष्काम सेवा करना, समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, स्वच्छता तथा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करना और आदर्श नागरिकता का प्रचार करना ।उसी वर्ष करुला  गांगन में भयंकर बाढ़ आई  तब उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ उल्लेखनीय सेवा कार्य किया। नगर के गली मुहल्लों में स्वयं झाडू लगाकर सड़कों पर पड़े केले के छिलके उठाकर उन्होंने नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। धीरे-धीरे सेवा कार्य क्षेत्र को व्यापक बनाते गए। 

सभी धर्मों के त्योहारों पर करते थे कार्यक्रम

महानगर में चाहे हिंदुओं के पर्व हों या मुस्लिमों के, सिखों के त्योहार हों या फिर ईसाइयों के। सभी में समान रूप से हिस्सा लेकर उन्होंने समाज के समक्ष एक मिसाल कायम की। होली ईद क्रिसमस मिलन समारोह के साथ-साथ भगवान महावीर जयंती पर भी उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत की । विभिन्न जयन्तियों व धार्मिक पर्वों के अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज से प्रारंभ होने वाली शोभा यात्राओं का सौंफ इलायची और शीतल जल के साथ वाली गली के मोड़ पर जनता सेवक समाज के बैनर तले स्वागत किया जाना उल्लेखनीय है। इसी तरह विभिन्न धार्मिक अवसरों पर आयोजित होने वाले मेलों में सेवा शिविर लगाना भी उनके सामाजिक कार्यों में शामिल रहता था 

प्रभात फेरियां निकाल कर एकत्र करते थे पुराने कपड़े 

होली के अवसर पर कई दिन पूर्व पहले से ही उनका प्रभातफेरी निकाल कर टेसू के फूलों से होली खेलने, शराब पीकर हुड़दंग ना करने और पर्व को शांति व सद्भाव से मनाने का अनुरोध करना आज भी स्मरणीय है। इसी तरह दीपावली पर पटाखे छोड़ने का भी अनुरोध करते थे। यही नहीं प्रभातफेरी निकालकर गली मोहल्लों में घूमते हुए घरों से  पुराने कपड़े भी एकत्र करते थे और उन्हें मलिन बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों को वितरित करते थे ।बाजी गिरान स्थित एक शराब की दुकान को हटाने के लिए हुए आंदोलन में उनकी भूमिका की लोग आज भी सराहना करते हैं। जनता सेवक समाज ही नहीं बल्कि हरिजन सेवक समाज नशाबंदी समिति अखिल भारतीय रचनात्मक समाज आर्य समाज आदि अनेक समाजसेवी संस्थाओं के माध्यम से भी उन्होंने सेवा कार्यो को अंजाम दिया।  

मुरादाबाद वाणी साप्ताहिक समाचार पत्र का किया था संपादन व प्रकाशन

धर्मात्मा सरन का योगदान समाज सेवा तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि पत्रकारिता क्षेत्र में भी रहा। वर्ष 1969 में जनवरी में उन्होंने मुरादाबाद वाणी का प्रकाशन व संपादन भी प्रारंभ किया जो समाज को रचनात्मक दिशा देने का आह्वान वर्ष 1984 तक करता रहा। बाद में आर्थिक कारणों से उन्हें इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा आपके द्वारा किए गए सेवा कार्यों से प्रभावित होकर नगर के अनेक संगठनों ने उन्हें सम्मानित भी किया जिसमें वर्ष 1989 में साहु शिव शक्ति शरण कोठीवाल ट्रस्ट द्वारा किया गया नागरिक अभिनंदन उल्लेखनीय है। समाज को एक नई दिशा देने वाले हम सबके प्रेरणा स्रोत धर्मात्मा सरन का निधन 9 जुलाई 2008 को हो गया था। मृत्यु उपरांत भी वह अपने नेत्रों का दान कर समाज को एक संदेश दे गए । उनके सामाजिक योगदान के दृष्टिगत  नगर निगम द्वारा मंडी चौक चौराहे से पान दरीबा तक का मार्ग धर्मात्मा सरन मार्ग घोषित किया गया है।   मंडी चौक चौराहे पर लगा इसका शिलालेख नागरिकों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता  है। वर्तमान में उनके पुत्र सुभाष गुप्ता, आनन्द गुप्ता पुत्रियां  मनोरमा गुप्ता - पूनम गुप्ता और पौत्र  सुमित गुप्ता जनता सेवक समाज के कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

::::: प्रस्तुति::::

डॉ मनोज रस्तोगी

8, जीलाल स्ट्रीट

मुरादाबाद 244001

उत्तर प्रदेश, भारत

मोबाइल फोन नंबर 9456687822

 अगर आपके पास भी श्री धर्मात्मा सरन जी के विषय में कोई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी या दुर्लभ फोटो हो तो उसे अवश्य साझा कीजियेगा। 

















मुरादाबाद मंडल के जनपद बिजनौर के साहित्यकार अशोक मधुप का आलेख ....कभी बिजनौर की दुल्हन बनने वालीं थी वहीदा रहमान । यह आलेख प्रकाशित हुआ है बिजनौर से प्रकाशित चिंगारी सांध्य के 27 सितंबर के अंक में ।

  अभिनेत्री वहीदा रहमान को प्रतिष्ठित  दादा साहब फालके पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। ये घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक...